शब्दशक्ति के साधक शलाका पुरुष अरविंद कुमार

In Uncategorized by Dayanand PandeyLeave a Comment

 

clip_image002[4]

Figure 1 अरविंद कुमार

 

शब्द मनुष्य की सब से बड़ी उपलब्धि हैँ, प्रगति के साधन और ज्ञान विज्ञान के भंडार हैँ, शब्दोँ की शक्ति अनंत है.यह कहना है कोशकार अरविंद कुमार का, जिन्हेँ हिंदी अकादेमी दिल्ली द्वारा इस साल शलाका सम्मान से अलंकृत किया जा रहा है. शब्दोँ के संकलन और कोटिकरण मेँ वह 81-वर्षीय जीवन के लगभग चालीस साल से अकेले ही नहीँ अपने पूरे परिवार के साथ शक्ति की साधना करते रहे हैँ. अपनी बात आगे बढ़ाते हुए वे कहते हैँ:संस्कृत के महान वैयाकरणिक महर्षि पतंजलि का कथन है : ‘सही तरह समझे और इस्तेमाल किए गए शब्द इच्छाओँ की पूर्ति का साधन हैँ.और इंग्लिश लेखक मार्क ट्वेन ने लिखा: ‘सही शब्द और लगभग सही शब्द मेँ वही अंतर है जो बिजली की चकाचौँध और जुगनू की टिमटिमाहट मेँ होता है.’ ”

वह बताते हैं, यह जो सही शब्द है और इस सही शब्द की तलाश है, इस के लिए भाषाई उपकरण बनाने का काम भारत मेँ हज़ारोँ साल पहले ही शुरू हो गया था, जब प्रजापति कश्यप ने वैदिक शब्दोँ का संकलन निघंटु बनाया और बाद में महर्षि यास्क ने संसार का सब से पहला ऐनसाइक्लोपीडिक कोश निरुक्त बनाया. इसे पराकाष्ठा पर पहुँचाया छठी-सातवीँ शताब्दी मेँ अमर सिंह ने अमर कोश के द्वारा.

इस परंपरा को फिर से जीवित किया अरविंद कुमार ने 1996 मेँ समांतर कोश दे कर. रोजेट के विश्वविख्यात इंग्लिश थिसारस को पीछे छोड़ने वाले समांतर कोश ने हिंदी को संसार की अग्रतम भाषाओँ में खड़ा कर दिया था, और बाद में विश्व के विशालतम इंग्लिश-हिंदी-इंग्लिश थिसारस और शब्दकोश (2007) अरविंद कुमार ने नया कीर्तिमान स्थापित किया. अब अरविंद लैक्सिकन के द्वारा उन्हों ने इंटरनेट पर संसार का विशालतम द्विभाषी हिंदी-इंग्लिश शब्दकोश-थिसारस और भाषाखोजी पेश किया है. शीघ्र ही वह इस कोश में भारतीय भाषाओं में से तमिल और एशिया की भाषाओं में से चीनी शब्द जोड़ने की योजना में लगे हैं.

अभी तक अपने को शलाका पुरुष न मान कर शब्दश्रमिक मानने वाले अरविंद की कहानी लंबी है. संक्षेप में कहें तो अरविंद ने अपना कार्य जीवन मैट्रिक का परीक्षाफल आने से पहले ही 1 अप्रैल 1945 से पंदरह वर्ष की उमर में एक बालश्रमिक के रूप में दिल्ली के एक प्रसिद्ध मुद्रणालय (दिल्ली प्रैस) में कंपोज़िंग तथा डिस्ट्रब्यूटिंग सीखने से आरंभ किया. कुछ ही महीनों में दिल्ली प्रैस से हिंदी की पारिवारिक पत्रिका सरिता का प्रकाशन आरंभ हुआ. उस के संपादन विभाग तक पहुँचने के लिए अरविंद कुमार ने छः साल तक कंपोज़ीटर, मशीनमैन, कैशियर, टाइपिस्ट, और प्रूफ़रीडर के तौर पर काम किया. साथ ही साथ वे सायंकालीन संस्थानों में पढ़ भी रहे थे. कैंप कालिज से 1956 मेँ पंजाब विश्वविद्यालय से अँगरेजी साहित्य मेँ ऐम. ए. की डिग्री ली.

सरिता में उप संपादक से सहायक संपादक और फिर दिल्ली प्रैस की ही प्रसिद्ध अँगरेजी पत्रिका कैरेवान में सहायक संपादक पद पर वे उसी संस्थान में सन 1963 के मध्य तक रहे. वहीं से उन की देखरेख में उर्दू सरिता और हिंदी मुक्ता का प्रकाशन भी आरंभ हुआ.

कैरेवान के बाद अरविंद कुमार टाइम्स आफ़ इंडिया संस्थान से हिंदी की फ़िल्म पत्रिका माधुरी का संपादन आरंभ करने मुंबई चले गए. वहाँ अपने समकालीन हिंदी संपादकों के संपर्क से तो बहुत कुछ सीखा ही, फ़िल्म उद्योग के गुणी निर्देशकों, कलाकारों और संगीतकारों की रचना प्रक्रिया को नज़दीक से देखा भी. वह कला फ़िल्मों के आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़े रहे. उस आंदोलन को समांतर सिनेमा  नाम उन्हों ने ही दिया था.

1978 में समांतर कोश की रचना को पूरा समय देने के लिए वे माधुरी का संपादन त्याग कर सपरिवार दिल्ली चले आए. समांतर कोश के लिए कहीं से कोई आर्थिक अनुदान या सहायता नहीं मिल रही थी. दिल्ली की बाढ़ में फँसने के बाद घर बदल कर गाज़ियाबाद चले गए. बिगड़ती आर्थिक स्थिति को सँभालने के लिए एक बार फिर 1980 से कुछ बरसों के लिए पत्रकारिता की ओर रुख़ किया और रीडर्स डाइजेस्ट का हिंदी संस्करण सर्वोत्तम आरंभ किया. 1985 से उन्हों ने एक बार फिर से समांतर कोश  को पूरा समय देना शुरू किया.

शैक्सपीयर कृत जूलियस सीज़र के अरविंद कुमार के हिंदी काव्यानुवाद का प्रथम मंचन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के लिए इब्राहिम अल्काज़ी के निर्देशन मेँ हुआ था. इस के बाद विद्यालय के छात्रोँ द्वारा उस का मंचन होता रहा है.

कुसुम से अरविंद का विवाह दिल्ली मेँ 1959 मेँ हुआ. उन की दो संतान हैँ--बेटा डाक्टर सुमीत कुमार और बेटी मीता लाल.

अरविंद कुमार ने इटली, मारीशस, फ़्राँस, हालैंड. संयुक्त राज्य अमरीका, जापान, सिंगापुर, आस्ट्रेलिया, मलेशिया, थाईलैंड, इंग्लैंड, जरमनी आदि देशोँ की यात्रा की है. 1997 मेँ जापान मेँ वहाँ के भाषा संस्थान द्वारा विश्व थिसारसोँ पर आयोजत अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के मुख्य सत्र का सभापतित्व उन्होँ ने किया.

 

इस से पहले अरविंद कुमार को निम्न पुरस्कारोँ से विभूषित किया गया है--

·         महाराष्ट्र राज्य हिंदी अकादेमी द्वारा हिंदी सेवा सम्मान

·         केंद्रीय हिंदी संस्थान द्वारा डाक्टर हरदेव बाहरी सम्मान

 

प्रकाशन क्रम से अरविंद कुमार की कुछ कृतियाँ हैँ ---

समांतर कोश - हिंदी थिसारस

शब्देश्वरी - देवीदेवताओँ के नामों का समांतर कोश

सहज गीता - सहज संस्कृत पाठ और सहज हिंदी अनुवाद

विक्रम सैंधव जूलियस सीज़र का हिंदी काव्य रूपांतर

अँगरेजी-हिंदी जूलियस सीज़र (हिंदी काव्य अनुवाद)

फ़ाउस्ट - एक त्रासदी (हिंदी काव्य अनुवाद)

द पेंगुइन इंग्लिश-हिंदी/हिंदी-इंग्लिश थिसारस ऐंड डिक्शनरी

अरविंद लैक्सिकन – इलैक्ट्रोनिक हिंदी-इंग्लिश थिसारस-कोश और भाषा खोजी

 

 

Comments